दिल की बात
दिल का हाल चहेरेपे ना ढूंडे
दिल का हाल आखों में ना पढ़िए
दिल का हाल दिल से ही पूछिए
ज़रा इस दिल से दिल्लगी करके तो देखिए
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मुंबई में कुछ भी होता है
फिर क्यूँ आधे लोगो के हाथ में कटोरा है
अमीरो ने दोनो हाथ से पैसा बटोरा है
फिर क्यूँ फूटपातवाला आदमी सकुन से सोता है
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कर दिया ज़ालिम ने बदनाम उसके दोस्त के सामने,
छोड़ मेरा हाथ, लगी थी उसका हाथ थामने,
कैसे सहे हम सहे हम रोज अपनी नज़र के सामने
इसलिए आजकल कटती है शाम मैखनेमे
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साथ माँगने चले थे हम उनका
दिल जोड़ने चले थे हम अपना
काह दे ती दिल की हर बात शिद्दत से
उसने भी दिल तोड़ दीया अपनी फ़ितरत से
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