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दिल की बात

July 23rd, 2009

दिल का हाल चहेरेपे ना ढूंडे

दिल का हाल आखों में ना पढ़िए

दिल का हाल दिल से ही पूछिए

ज़रा इस दिल से दिल्लगी करके तो देखिए

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मुंबई में कुछ भी होता है

फिर क्यूँ आधे लोगो के हाथ में कटोरा है

अमीरो ने दोनो हाथ से पैसा बटोरा है

फिर क्यूँ फूटपातवाला आदमी सकुन से सोता है

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कर दिया ज़ालिम ने बदनाम उसके दोस्त के सामने,

छोड़ मेरा हाथ, लगी थी उसका हाथ थामने,

कैसे सहे हम सहे हम रोज अपनी नज़र के सामने

इसलिए आजकल कटती है शाम मैखनेमे

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साथ माँगने चले थे हम उनका

दिल जोड़ने चले थे हम अपना

काह दे ती दिल की हर बात शिद्दत से

उसने भी दिल तोड़ दीया अपनी फ़ितरत से

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छोटा आज भी स्कूल जाने को रोता है
कॉलेज खत्म्ह होने तक वो क्लास में सिर्फ़ सोता है
लेक्चर पे लेक्चर के बीच प्रोफेसर बोटा है
डिग्री मिलने पर भी नौकरी के फिर वो रोता है
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कहे हम ज़माने से, हम किसी से कम नही
हमसे करे मुक़ाबला ऐसा किसी में दम नही,
प्यार में चोट खाने के लिए हुमारे पास दिल नही
टूटे रिश्तो को जोड़ने के लिए हम म-सील नही
kar diya zaalim ne badnaam uske dost ke saamne,
chod mera haath, lagi thi uska haath thamne,
kaise sahe hum sahe hum roj apni nazar ke saamne
Isliye aajkal katati hai shaam
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